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Tag Archives: Manish

इतिहास के गहराते साए, इतिहास के गहराते साए,
अतीत के कुछ पन्ने जुड़कर क्यों मेरा भविष्य बनाये…
क्यों ना में लिखू कुछ अपना, मेरी महत्वाकंछा मेरा सपना,
या फ़िर सबकी इक्ष्हाये मिलकर मुझमे ना सिमट जाए….
इतिहास के गहराते साए, इतिहास के गहराते साए…

वक़्त के चेहरों ने फ़िर मुझे धोखा दिया, फ़िर वही पुरानी तस्वीरे मुझे दिखा दी गई,
मुझे ढाला गया फ़िर उन्ही शक्लो में, फ़िर वही आइनों में ख़ुद की सूरत छुपा दी गई…
कही शक्ल दुसरो की लगाते लगाते मेरी ही ना बदल जाए,
इतिहास के गहराते साए, इतिहास के गहराते साए,
अतीत के कुछ पन्ने जुड़कर क्यों मेरा भविष्य बनाये…

मनीष चौपडा_

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पानी पर लिखे हे सारे उजाले हे इसी सुबह में,
कोई भी हँसी भाती नही जब तू हे किसी विरह में…

अनंतता में ढूंडता में एक छोटा सा पल,
जो हँसाए तुझे और दूर कर ये अन्धकार छल…
मेरी आशाये बस घूम रही हे अधर में,
कोई भी हंसी भाति नही जब तू हे किसी विरह में…

आकाश, जल, हवा और धरा खंड,
आँख, प्यास, साँस अब हर कदम हे बंद…
क्यों अँधेरा सा हो रहा हे सहर में,
कोई भी हंसी भाति नही जब तू हे किसी विरह में…

मनीष चौपडा_