Skip navigation

Tag Archives: sansaar

स्वप्न संसार को छुने की इक्श्हाये लेकर राहो में बिखरता रहा में,
पंहुचा नही कही भी क्यूँ जबकि सारी उम्र चलता रहा मैं…
गर्म दोपहर, सर्द रातो में सोचता रहा, समझता रहा मैं,
पंहुचा नही कही भी क्यूँ जबकि सारी उम्र चलता रहा मै…

दूर और पास,
अहसास या बिना अहसास,
छोटा सा या बहुत खास ,
अन्धविश्वास या विश्वास,
हर सपने के लिए लड़ता रहा में,
कभी कभी संभल गया, कभी गिर गिर कर ही चलता रहा में..
पंहुचा नही कही भी क्यूँ जबकि सारी उम्र चलता रहा मै…

कभी पाई कुछ छोटी मंजिले,
कभी खो दिया एक पुरा जहाँ,
कभी बहुत दूर जाके वापिस लोटा,
कभी खोया यहाँ कभी खोया वहाँ..
हर छाँव के लिए कई कोस चलता रहा में,
कभी द्वेष, कभी विरह, कभी इर्ष्या अग्नि लेकर सदियों में भी जलता रहा में..
पंहुचा नही कही भी क्यूँ जबकि सारी उम्र चलता रहा मै…

मनीष चोपडा !!

Advertisements