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Tag Archives: Thinking

महत्वाकंक्छाओ की अबोध दौड़ महत्वाकंक्छाओ की अबोध दौड़,
कभी तुच्छता कभी अनंतता कभी विविधताओ की नदी सराबोर….
महत्वाकंक्छाओ की अबोध दौड़ महत्वाकंक्छाओ की अबोध दौड़|

धरती के गर्भ में फ़िर कुछ नया हे,
कल जो शिखर था आज खो गया हे!
में चलता रहा नई दिशा में हर तरफ़,
कदम दिशा विहीन मन् दिशाहिन् हो गया हे|

सिमटे मेरे प्रयत्न्न और फेले हुए विकल्प चारो और!
महत्वाकंक्छाओ की अबोध दौड़ महत्वाकंक्छाओ की अबोध दौड़,
कभी तुच्छता कभी अनंतता कभी विविधताओ की नदी सराबोर|

जन्म  मृत्यु  से परे हे,
चाहे दोनों समकक्ष खड़े हे,
चाहे कई विपदाये आए,
पर महत्वाकंक्छाओ के पंख बड़े हे|

सोच, स्वप्न, यथार्थ सब हे कमजोर!
महत्वाकंक्छाओ की अबोध दौड़ महत्वाकंक्छाओ की अबोध दौड़,
कभी तुच्छता कभी अनंतता कभी विविधताओ की नदी सराबोर|

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